टीबी की पहचान जल्दी हो तो इलाज और रोकथाम दोनों बेहतर

भारत ने टीबी खत्म करने के लक्ष्य में देरी देखी है, इसलिए सरकार ने उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों में सक्रिय स्क्रीनिंग पर जोर दिया है। अभियान में उन लोगों पर विशेष ध्यान है जिनमें जोखिम अधिक हो सकता है—धूम्रपान या शराब की आदत वाले लोग, एचआईवी या मधुमेह से जूझ रहे मरीज, जेलों और आश्रय गृहों में रहने वाले लोग तथा भीड़भाड़ वाले इलाकों के परिवार।\n\nलंबे समय तक खांसी, वजन कम होना, रात में पसीना या लगातार बुखार जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हर खांसी टीबी नहीं होती, लेकिन जांच में देरी से संक्रमण फैल सकता है और इलाज कठिन हो सकता है। पोषण सहायता और दवा का पूरा कोर्स भी उपचार का हिस्सा हैं।\n\nटीबी का संदेह हो तो सरकारी या मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य केंद्र से जांच कराएं। बिना सलाह दवा शुरू या बंद न करें। सही समय पर जांच मरीज और उसके परिवार दोनों की सुरक्षा बढ़ाती है।

Chikitsa TV

स्वास्थ्य समाचार, टिप्स और मेडिकल अपडेट्स