एक स्वास्थ्य रिपोर्ट में लाखों प्रिवेंटिव हेल्थ असेसमेंट के आधार पर बताया गया कि कामकाजी भारतीयों में अतिरिक्त वजन, मधुमेह और हृदय संबंधी जोखिम कम उम्र में दिखाई दे रहे हैं। समस्या यह है कि कई लोग तब तक जांच नहीं कराते जब तक कोई स्पष्ट लक्षण सामने न आए।\n\nवजन अकेला स्वास्थ्य का पूरा माप नहीं है। कमर का घेरा, रक्तचाप, रक्त शर्करा, नींद, शारीरिक गतिविधि और परिवार का इतिहास भी महत्वपूर्ण हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, अनियमित भोजन और लगातार तनाव जोखिम बढ़ा सकते हैं। छोटे लेकिन टिकाऊ बदलाव—नियमित चलना, पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और समय-समय पर जांच—व्यावहारिक शुरुआत हो सकते हैं।\n\nकिसी एक वायरल डाइट या सप्लीमेंट को इलाज न मानें। व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
कामकाजी लोगों में छिपे मेटाबॉलिक जोखिम को समझें
