टीबी उन्मूलन अभियान में उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की सक्रिय स्क्रीनिंग और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण संदिग्ध मामलों की पहचान में सहायता कर सकते हैं, लेकिन उनका काम डॉक्टर, प्रयोगशाला जांच और मरीज से बातचीत का स्थान लेना नहीं है।\n\nकिसी स्क्रीनिंग में संदिग्ध परिणाम आने का अर्थ बीमारी की अंतिम पुष्टि नहीं होता। आगे की जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है। इसी तरह सामान्य स्क्रीनिंग परिणाम होने पर भी लक्षण बने रहें तो मरीज को दोबारा सलाह लेनी चाहिए।\n\nतकनीक का लाभ तभी होगा जब जांच गरीब और दूरदराज के लोगों तक पहुंचे, रिपोर्ट समझने योग्य हो और इलाज शुरू होने में देरी न हो।
टीबी स्क्रीनिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका क्या हो सकती है
